Thursday, May 12, 2022
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अनुराग अनंत: मृत्यु जीवन को स्थान नहीं दे पाती जीवन जीते हुए सैकड़ों दफ़ा मरते हैं हम

अनुराग अनंत: मृत्यु जीवन को स्थान नहीं दे पाती जीवन जीते हुए सैकड़ों दफ़ा मरते हैं हम

कविता

मृत्यु जीवन को स्थान नहीं दे पाती 
जीते हुए मैंने मरने के बारे में सोचा 
मरने के बारे में भी जीते हुए ही सोचा जा सकता है
मरने के बाद जीने के बारे में सोचना संभव नहीं 
जीवन ही है जो मृत्यु को भी देता है जगह 
मृत्यु जीवन को स्थान नहीं दे पाती 
जीवन जीते हुए सैकड़ों दफ़ा मरते हैं हम 
मरने के बाद मृत्यु एक बार भी पुनर्जीवित नहीं होने देती 
जिसने भी जीवन को अनुदार कहा 
वह मृत्यु से होकर नहीं गुजरा था 
जो मृत्यु से होकर गुजरा 
उसके पास जीवन के बारे में कुछ कहने के लिए 
जीवन ही शेष नहीं रहा
Ravindra Kumarhttps://navdhardna.com/
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