Tuesday, June 21, 2022
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दीपावली पर्व पर विशेष : अंधेरे से प्रकाश की ओर जाइए जो हमारा अध्यात्म रास्ता दिखाता है

 

तमसो मा ज्योतिर्गमन अर्थात अंधेरे से प्रकाश की ओर जाइए जो हमारा अध्यात्म रास्ता दिखाता है दीपावली पर्व जो शरद ऋतु में हर वर्ष मनाया जाता है प्राचीन संस्कृति का यह त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को अंधकार से प्रकाश की विजय का प्रतीत है दीपावली को मनाने के विषय में यह भी बताया जाता है कि भगवान श्री राम माता सीता और लक्ष्मण चोदह वर्ष के वनवास के बाद जब अयोध्या वापस आते हैं तो अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत और अभिनंदन किया था पाच दिन तक इस त्यौहार को लोग हर्षोल्लास मनाते हैं यह देश का सबसे बड़ा त्यौहार भी माना जाता है बच्चे घरों में पटाखे फुलझड़ी छोड़कर खुशियां मनाते हैं और लक्ष्मी की आराधना करते हैं कलयुग में माता लक्ष्मी एक ऐसी देवी जो भौतिक सुखो की प्राप्ति कराती है इसलिए घरों में दीपावली के पर्व पर लक्ष्मी माता की सभी लोग पूजा करके घर परिवार में सुख शांति धन की कामना करते हैं इस त्यौहार में एक बुराई भी आती है परंपराओं के अनुसार कुछ लोग जुआ भी खेलते हैं लेकिन पूर्व की अपेक्षा अब यह बहुत कम नजर आता है दीपावली से पूर्व घरों की सफाई रंगाई पुताई कराई जाती है और वस्त्र बर्तन आभूषण परंपराओं के अनुसार लोग खरीदते हैं हजारों वर्षों से दीपों के इस पर्व को समाज मनाता चला आ रहा है लेकिन आज पूर्व की भांति इस के रूप में कई परिवर्तन देखने को मिलते हैं बाहर के अंधकार को मिटाने के लिए लोग लगे रहते हैं परंतु अंदर का अंधकार लोगों का दिन पर दिन भ्रष्टाचार अनाचार दुराचार के रूप में बढ़ता जा रहा है इसलिए जीवन स्वर्ग बनने के बजाय नर्क बनता जा रहा है परिणाम स्वरूप मानवीय जीवन तनाव और दबाव में के कारण पारिवारिक वातावरण आनंदित नहीं है मात्र औपचारिकताओं में ही त्योहारों को मनाया जा रहा है इसके पीछे मानवीय नकारात्मक सोच है क्योंकि भौतिकता की भूख ने व्यक्ति को अहंकारी बना दिया है इसलिए व्यक्ति स्वयं से लड़ रहा है उसे किस मंजिल की तलाश है और कहां पहुंचना चाहता है उसे स्वयं को भी यह पता नहीं है इस दौड़ यह उदाहरण की विश्व विजेता सिकंदर ने अपनी मृत्यु से पूर्व कहा था कि मरने के बाद मेरे हाथ ताबूत से बाहर निकाल देना जिससे लोगों को यह लगे की दुनिया पर विजय प्राप्त करने वाला सिकंदर दुनिया से जब गया तो खाली हाथ था यह सभी के जीवन पर लागू होता है आज की अंधी दौड़ ने व्यक्ति को गुलाम बना दिया है यह सोचनीय और चिंतनीय विषय है इस अंधी दौड़ से समाज को निकलना होगा और सोच को बदलना होगा आज घरों में दीपावली पर लक्ष्मी की पूजा की जाती है और धन की कामना भी की जाती है धार्मिक ग्रंथों में नारी को बहुत बड़ा सम्मान दिया गया है क्योंकि नारी कल भी पूजनीय थी आज भी पूजनीय है और आगे भी पूजनीय रहेगी किसी भी राष्ट्र के विकास प्रगति उन्नति और खुशहाली के लिए उस राष्ट्र की नारी का खुशहाल रहना नितांत आवश्यक है राष्ट्र के निर्माण में देश की नारियों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है ऋषि मुनियों संतो तपस्वी और अध्यात्म मैं हमारे देश को विश्व में जाना और पहचाना जाता है इसलिए यहां कण-कण में भगवान को स्मरण भी किया जाता है संजीव ही नहीं निर जीवो के प्रति भी हमारी आस्था सदैव श्रद्धा वान बनी रहती है रोशनी के इस पर्व को कमजोर असहाय गरीब निर्धन लोगों के साथ मिलकर खील बताशे मिठाई खिलाकर उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने का संकल्प लिया जाए क्योंकि दीपावली दीपों का त्यौहार संदेश लेकर आता है की बाहर की रोशनी करने की अपेक्षा प्रत्येक व्यक्ति अपने अंदर रोशनी जलाए जिससे उसके अंदर का दुराचार अनाचार भ्रष्टाचार खत्म हो और वह त्योहारों की सार्थकता को समझे और घर परिवार समाज राष्ट्र की उन्नति में उसका योगदान बना रहे यह सत्य है कि दीपावली के दीपों के प्रकाश से बाहर का अंधकार मिटता है उसी प्रकार मनुष्य के मन मस्तिष्क में जो अंधकार छाया हुआ है उसे भी मिटाया जाए और दीपों के पर्व दीपावली के प्रकाश को जीवन में उतार कर घर परिवार समाज राष्ट्र के कल्याण के लिए जीने का प्रयास किया जाए.

(जगतपाल सिंह,एडवोकेट )

जगतपाल सिंह एडवोकेटhttps://navdhardna.com/
जगतपाल सिंह एडवोकेट एवं पत्रकार निवासी सिंह कॉटेज गुलावठी जनपद बुलंदशहर, शिक्षा एम ए राजनीति शास्त्र समाजशास्त्र विधि स्नातक विधि व्यवसाय सत्र न्यायालय बुलंदशहर जनपद बुलंदशहर लेखक साहित्यकार पत्रकार , पत्रकारिता क्षेत्र में अनेक सामाजिक संस्थाओं से सम्मानित
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